मंगलवार, 11 सितंबर 2018

संत फ्रांसिस असीसी की प्रार्थना

हे प्रभु मुझे अपनी शांति का दूत बना दे
जहाँ घृणा हो वहां मुझे प्यार फैलाने दे
चोट के बदले मुझे क्षमा प्रदान करने दे
झूठ के बदले सत्य का प्रकाश बना दे
जहाँ संदेह हो वहां मुझे विश्वास जगाने दे निराशा को आशा में बदलने दे
जहाँ अंधकार हो वहां मुझे ज्योति जलाने दे
उदासी के स्थान पर ख़ुशी फैलाने दे
मुझे ऐसी कृपा प्रदान कर की मैं दिलासा पाने की अपेक्षा दिलासा दूँ
समझा जाने की अपेक्षा समझ सकूँ
प्यार पाने की अपेक्षा प्यार दूँ
क्यूंकि देने में ही हम पाते हैं क्षमा करने में ही क्षमा मिलती है और मृत्यु द्वारा ही हम अनंत जीवन में जन्म लेते हैं। 


सोमवार, 10 सितंबर 2018

सहायता के लिए प्रार्थना

हे दयालु ईश्वर तेरी भलाई और दया अपार है
आप पास हम अपने पापों की क्षमा मांगने आते हैं
आप हमें अपनी शरण में ले लीजिये
हे संत युसूफ हम परेशानियों में आपके पास आते हैं आपसे मध्यस्थता प्रार्थना की विनती करते हैं
हम पर कृपा करिये हमारी जरूरतों में हमारी सहायता करिये
आप हमें संरक्षण प्रदान करिये
हे पवित्र परिवार के विवेकशील संरक्षक हमारी सहायता करिये



शुक्रवार, 7 सितंबर 2018

The Nativity of Our Lady

माता मरियम हम आपकी शरण आये हैं
हम आपके चरणों में अपनी सारी प्रार्थना दुःख तकलीफ भय समर्पित करते हैं
हम बीमार लोगों के लिए आपसे प्रार्थना करते हैं
हम उन लोगों को भी आपके पवित्र चरणों में समर्पित करते हैं जो की पारिवारिक जीवन में दुखी हैं ,
माता मरियम उन लोगों के लिए भी मध्यस्थता प्रार्थना करिये जो की बेरोजगार है जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं
माता मरियम आप हमें अपने आँचल में संरक्षण प्रदान करिये।  

बुधवार, 5 सितंबर 2018

पवित्रात्मा से प्रार्थना

हे पवित्रात्मा आप स्वर्ग से उतर आइये
आपकी प्रज्ञा की किरणों को स्वर्ग से भेज दीजिये
हे वरदाता ह्रदय के प्रकाश आप विराजमान हों
आपकी प्रज्ञा के अलावा मनुष्यों में दोष के अलावा और कुछ भी नहीं है।  घृणितों को धो डालिये
मुरझाये हुए को सींच डालिये चोटग्रस्त को अच्छा करिये बीमारों को चंगा करिये
हम आपकी शरण आते हैं हमें अपना संरक्षण प्रदान करिये
हम पर  अपने  वरदान बरसाइये। 


सोमवार, 3 सितंबर 2018

प्रार्थना स्वयं को ईश्वर के हाथों में सौंप देना है।  यह कठिन कार्य है क्यूंकि आज की आपाधापी भरे जीवन में हमें सब कुछ इंस्टेंट चाहिए ईश्वर से कृपा भी।  पर यह सही नहीं।  प्रार्थना के लिए ध्यान की जरुरत है।  हमारा अक्सर प्रार्थना में मन नहीं लगता।  पर प्रार्थना जितनी सरल है उतनी ही मुश्किल भी।  प्रभु ईसा स्वयं प्रार्थना करते थे।  यह सत्य प्रार्थना की शक्ति को रेखांकित करता है।  पवित्र ग्रंथ में कई स्थानों पर प्रार्थना कैसे करें और प्रभु ईसा प्रार्थना कैसे करते थे बताया है।  प्रभु ईसा ने हमें हे हमारे पिता प्रार्थना सिखाई है जो आदर्श प्रार्थना है।  पवित्र ग्रंथ कहता है की पवित्रात्मा हमारी अस्पष्ट आहों को भी ईश्वर तक पहुंचते हैं।  

शुक्रवार, 31 अगस्त 2018

प्रभु ईसा और मित्रता

दोस्ती कैसी हो प्रभु ईसा हमें बताते हैं।  दोस्ती एक चमकता प्रकाश है जो की हमारे जीवन में हमारे आसपास सबकुछ जगमगा देते है।  दोस्ती समझ है कॉन्ट्रैक्ट नहीं।  दोस्त ऐसी फॅमिली है जिन्हें हम खुद चुनते हैं।  कहते हैं संगति का असर होता है।  यह सच भी है।  मित्रता कैसी हो प्रभु ईसा ने हमें बताया है।  प्रभु ईसा ने अपने मित्रों के लिए अपना जीवन अर्पित कर दिया।  इससे बड़ा प्रेम हम से कौन कर सकता है।  हम अनेक लोगों से मिलते हैं।  और कई हमारे दोस्त होने का दावा भी करते हैं पर असल में दोस्ती की परख जरुरत के समय होती है।  दोस्त ऐसा हो जो हमें बताये की हम कहाँ गलत हैं और कहाँ सही।  दोस्त ऐसा हो जो की हम पर गर्व करे और हमारा साथ दे।  सच में दोस्ती का रिश्ता दिल से होना चाहिए। सच्ची दोस्ती से बहुमूल्य कुछ नहीं।  एक ऐसा व्यक्ति जो की हमें समझे हमारा सहारा हो।  और प्रभु ईसा से बढ़कर ऐसा सच्चा दोस्त कोई हो सकता है। 


बुधवार, 29 अगस्त 2018

ईश्वर के चरणों में समर्पण

 `डरो मत मैं तुम्हारे साथ हूँ
चिंता मत करो मैं तुम्हारा ईश्वर हूँ
मैं तुम्हें सकती प्रदान कर तुम्हारी सहायता करूँगा
मैं अपने विजयी दाहिने हाथ से तुम्हें सम्भालूंगा
हम जब बस में यात्रा करते हैं तो अक्सर हमें नींद आ जाती है।  हम सो भी जाते हैं।  हम चिंता नहीं करते की गाड़ी ठीक तो चल रही है अर्थात हम ड्राइवर पर विश्वास करते हैं।  जीवन भी एक यात्रा है पर इस यात्रा में चिंता भय हमें ज्यादा रहता है।  हम अगर सोचें क्यों तो इसका जवाब भी हमें समझ आ जायेगा।  हम अक्सर जीवन की कमान अपने हाथों में रखते हैं।  स्वयं अपनी गाड़ी को नियंत्रित करना चाहते हैं।  हमें स्मरण नहीं रहता की हम मनुष्य हैं।  यही कारण है की हम दुःख कष्टों से घिरे , सत्य का मार्ग नहीं समझ पते वह मार्ग प्रभु ईसा स्वयं हैं।  जरुरत है अपने जीवन की कमान को ईश्वर के हाथों में सौंप दें।  हमें एहसास होगा की हममें असीम शक्ति है जो वे कार्य भी कर सकती है जो हमारी क्षमताओं से परे है।  ईश्वर हमारे साथ है तो कौन  हमारे विरुद्ध होगा।